॥ श्रीहरिः ॥
गदाप्रहारव्यथितो भृशं विह्वलितो गजः।
जानुभ्यां धरणीं स्पृष्ट्वा कश्मलं२ परमं ययौ॥ १५
gadāprahāravyathito bhṛśaṃ vihvalito gajaḥ|
jānubhyāṃ dharaṇīṃ spṛṣṭvā kaśmalaṃ paramaṃ yayau|| 15
अर्थ
गदाकी चोटसे ऐरावतको बड़ी पीड़ा हुई, उसने व्याकुलतासे घुटने टेक दिये और फिर मूर्च्छित हो गया!॥ १५॥
गदाप्रहारव्यथितो भृशं विह्वलितो गजः।
जानुभ्यां धरणीं स्पृष्ट्वा कश्मलं परमं ययौ॥ १५
गदाकी चोटसे ऐरावतको बड़ी पीड़ा हुई, उसने व्याकुलतासे घुटने टेक दिये और फिर मूर्च्छित हो गया!॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 959) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/11/15/टिप्पणियाँ
- २
प्रा० पा०—लं च परं ययौ।
(मुद्रित पृष्ठ 959)