पाकने सौ बाणोंसे मातलिको और सौ बाणोंसे रथके एक-एक अंगको छेद डाला। युद्धभूमिमें यह बड़ी अद्भुत घटना हुई कि एक ही बार इतने बाण उसने चढ़ाये और चलाये॥ २२॥✎ 1978
शताभ्यां मातलिं पाको रथं सावयवं पृथक्।
सकृत्सन्धानमोक्षेण तदद्भुतमभूद् रणे॥ २२
पाकने सौ बाणोंसे मातलिको और सौ बाणोंसे रथके एक-एक अंगको छेद डाला। युद्धभूमिमें यह बड़ी अद्भुत घटना हुई कि एक ही बार इतने बाण उसने चढ़ाये और चलाये॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 959) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/11/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1978 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): अपने → अपनी