श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.11.22

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

शताभ्यां मातलिं पाको रथं सावयवं पृथक्।

सकृत्सन्धानमोक्षेण तदद्भुतमभूद् रणे॥ २२

śatābhyāṃ mātaliṃ pāko rathaṃ sāvayavaṃ pṛthak|

sakṛtsandhānamokṣeṇa tadadbhutamabhūd raṇe|| 22

अर्थ

पाकने सौ बाणोंसे मातलिको और सौ बाणोंसे रथके एक-एक अंगको छेद डाला। युद्धभूमिमें यह बड़ी अद्भुत घटना हुई कि एक ही बार इतने बाण उसने चढ़ाये और चलाये॥ २२॥✎ 1978

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