॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.11.26
ततस्तुराषाडिषुबद्धपञ्जराद्
विनिर्गतः साश्वरथध्वजाग्रणीः।
बभौ दिशः खं पृथिवीं च रोचयन्
स्वतेजसा सूर्य इव क्षपात्यये॥ २६
tatasturāṣāḍiṣubaddhapañjarād
vinirgataḥ sāśvarathadhvajāgraṇīḥ|
babhau diśaḥ khaṃ pṛthivīṃ ca rocayan
svatejasā sūrya iva kṣapātyaye|| 26
अर्थ
परन्तु थोड़ी ही देरमें शत्रुओंके बनाये हुए बाणोंके पिंजड़ेसे घोड़े, रथ, ध्वजा और सारथिके साथ इन्द्र निकल आये। जैसे प्रातःकाल सूर्य अपनी किरणोंसे दिशा, आकाश और पृथ्वीको चमका देते हैं, वैसे ही इन्द्रके तेजसे सब-के-सब जगमगा उठे॥ २६॥