श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.11.34

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

येन मे पूर्वमद्रीणां पक्षच्छेदः प्रजात्यये१।

कृतो नि२विशतां भारैः पतत्त्रैः पततां भुवि॥ ३४

yena me pūrvamadrīṇāṃ pakṣacchedaḥ prajātyaye|

kṛto niviśatāṃ bhāraiḥ patattraiḥ patatāṃ bhuvi|| 34

अर्थ

पहले युगमें जब ये पर्वत पाँखोंसे उड़ते थे और घूमते-फिरते भारके कारण पृथ्वीपर गिर पड़ते थे, तब प्रजाका विनाश होते देखकर इसी वज्रसे मैंने उन पहाड़ोंकी पाँखें काट डाली थीं॥ ३४॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—जाक्षये।

    (मुद्रित पृष्ठ 961)
  2. २

    प्रा० पा०—वि०।

    (मुद्रित पृष्ठ 961)

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें