इसे मैं वर दे चुका हूँ कि ‘सूखी या गीली वस्तुसे तुम्हारी मृत्यु न होगी।’ इसलिये इन्द्र! इस शत्रुको मारनेके लिये अब तुम कोई दूसरा उपाय सोचो!’’॥ ३८॥
मयास्मै यद् वरो दत्तो मृत्युर्नैवार्द्रशुष्कयोः।
अतोऽन्यश्चिन्तनीयस्ते उपायो मघवन् रिपोः॥ ३८
इसे मैं वर दे चुका हूँ कि ‘सूखी या गीली वस्तुसे तुम्हारी मृत्यु न होगी।’ इसलिये इन्द्र! इस शत्रुको मारनेके लिये अब तुम कोई दूसरा उपाय सोचो!’’॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 961) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/11/38/