श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.11.39

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तां दैवीं गिरमाकर्ण्य मघवान्सुसमाहितः।

ध्यायन् फेनमथापश्यदुपायमुभयात्मकम्॥ ३९

tāṃ daivīṃ giramākarṇya maghavānsusamāhitaḥ|

dhyāyan phenamathāpaśyadupāyamubhayātmakam|| 39

अर्थ

उस आकाशवाणीको सुनकर देवराज इन्द्र बड़ी एकाग्रतासे विचार करने लगे। सोचते-सोचते उन्हें सूझ गया कि समुद्रका फेन तो सूखा भी है, गीला भी;॥ ३९॥

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