श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.12.14

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

एवमभ्यर्थितो विष्णुर्भगवान् शूलपाणिना।

प्रहस्य भावगम्भीरं गिरिशं प्रत्यभाषत॥ १४

evamabhyarthito viṣṇurbhagavān śūlapāṇinā|

prahasya bhāvagambhīraṃ giriśaṃ pratyabhāṣata|| 14

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—जब भगवान् शंकरने विष्णुभगवान्‌से यह प्रार्थना की, तब वे गम्भीरभावसे हँसकर शंकरजीसे बोले॥ १४॥✎ 732

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #732 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् से → विष्णुभगवान्‌से

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