श्रीशुकदेवजी कहते हैं—इस तरह कहते-कहते विष्णुभगवान् वहीं अन्तर्धान हो गये और भगवान् शंकर सती देवीके साथ चारों ओर दृष्टि दौड़ाते हुए वहीं बैठे रहे॥ १७॥✎ 2034
इति ब्रुवाणो भगवांस्तत्रैवान्तरधीयत।
सर्वतश्चारयंश्चक्षुर्भव आस्ते सहोमया॥ १७
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—इस तरह कहते-कहते विष्णुभगवान् वहीं अन्तर्धान हो गये और भगवान् शंकर सती देवीके साथ चारों ओर दृष्टि दौड़ाते हुए वहीं बैठे रहे॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.12.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 965) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/12/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)