भरतवंशशिरोमणे! भगवान् शंकरने बड़े-बड़े ऋषियोंकी सभामें अपनी अर्द्धांगिनी सती देवीसे अपने विष्णुरूपकी अंशभूता मायामयी मोहिनीका इस प्रकार बड़े प्रेमसे वर्णन किया॥ ४२॥
आत्मांशभूतां तां मायां भवानीं भगवान्भवः।
शंसतामृषिमुख्यानां प्रीत्याऽऽचष्टाथ भारत॥ ४२
भरतवंशशिरोमणे! भगवान् शंकरने बड़े-बड़े ऋषियोंकी सभामें अपनी अर्द्धांगिनी सती देवीसे अपने विष्णुरूपकी अंशभूता मायामयी मोहिनीका इस प्रकार बड़े प्रेमसे वर्णन किया॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.12.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 968) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/12/42/