॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.15.10
तुल्यैश्वर्यबलश्रीभिः स्वयूथैर्दैत्ययूथपैः।
पिबद्भिरिव खं दृग्भिर्दहद्भि परिधीनिव॥ १०
tulyaiśvaryabalaśrībhiḥ svayūthairdaityayūthapaiḥ|
pibadbhiriva khaṃ dṛgbhirdahadbhi paridhīniva|| 10
अर्थ
उनके साथ उन्हींके समान ऐश्वर्य, बल और विभूतिवाले दैत्यसेनापति अपनी-अपनी सेना लेकर हो लिये। ऐसा जान पड़ता था मानो वे आकाशको पी जायँगे और अपने क्रोधभरे प्रज्वलित नेत्रोंसे समस्त दिशाओंको, क्षितिजको भस्म कर डालेंगे॥ १०॥