श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.15.10

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

तुल्यैश्‍वर्यबलश्रीभिः स्वयूथैर्दैत्ययूथपैः।

पिबद्भिरिव खं दृग्भिर्दहद्भि परिधीनिव॥ १०

tulyaiśvaryabalaśrībhiḥ svayūthairdaityayūthapaiḥ|

pibadbhiriva khaṃ dṛgbhirdahadbhi paridhīniva|| 10

अर्थ

उनके साथ उन्हींके समान ऐश्‍वर्य, बल और विभूतिवाले दैत्यसेनापति अपनी-अपनी सेना लेकर हो लिये। ऐसा जान पड़ता था मानो वे आकाशको पी जायँगे और अपने क्रोधभरे प्रज्वलित नेत्रोंसे समस्त दिशाओंको, क्षितिजको भस्म कर डालेंगे॥ १०॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें