राजा बलिने इस बहुत बड़ी आसुरी सेनाको लेकर उसका युद्धके ढंगसे संचालन किया तथा आकाश और अन्तरिक्षको कँपाते हुए सकल ऐश्वर्योंसे परिपूर्ण इन्द्रपुरी अमरावतीपर चढ़ाई की॥ ११॥
वृतो विकर्षन् महतीमासुरीं ध्वजिनीं विभुः।
ययाविन्द्रपुरीं स्वृद्धां कम्पयन्निव रोदसी॥ ११
राजा बलिने इस बहुत बड़ी आसुरी सेनाको लेकर उसका युद्धके ढंगसे संचालन किया तथा आकाश और अन्तरिक्षको कँपाते हुए सकल ऐश्वर्योंसे परिपूर्ण इन्द्रपुरी अमरावतीपर चढ़ाई की॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.15.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 975) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/15/11/