श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.15.12

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

रम्यामुपवनोद्यानैः२ श्रीमद्भिर्नन्दनादिभिः।

कूजद्विहङ्गमिथुनैर्गायन्मत्तमधुव्रतैः ॥ १२

ramyāmupavanodyānaiḥ śrīmadbhirnandanādibhiḥ|

kūjadvihaṅgamithunairgāyanmattamadhuvrataiḥ || 12

अर्थ

देवताओंकी राजधानी अमरावतीमें बड़े सुन्दर-सुन्दर नन्दन वन आदि उद्यान और उपवन हैं। उन उद्यानों और उपवनोंमें पक्षियोंके जोड़े चहकते रहते हैं। मधुलोभी भौंरे मतवाले होकर गुनगुनाते रहते हैं॥ १२॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—रम्यां नृप गृहोद्यानैः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 975)

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