सर्वशक्तिमान् भगवान्को छोड़कर तुम या तुम्हारे-जैसा और कोई भी बलिके सामने उसी प्रकार नहीं ठहर सकता, जैसे कालके सामने प्राणी॥ २९॥✎ 747
भवद्विधो भवान्वापि वर्जयित्वेश्वरं हरिम्।
नास्य शक्तः पुरः स्थातुं कृतान्तस्य यथा जनाः॥ २९
सर्वशक्तिमान् भगवान्को छोड़कर तुम या तुम्हारे-जैसा और कोई भी बलिके सामने उसी प्रकार नहीं ठहर सकता, जैसे कालके सामने प्राणी॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.15.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 977) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/15/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)