॥ श्रीहरिः ॥
तस्मान्निलयमुत्सृज्य यूयं सर्वे त्रिविष्टपम्।
यात कालं प्रतीक्षन्तो यतः शत्रोर्विपर्ययः॥ ३०
tasmānnilayamutsṛjya yūyaṃ sarve triviṣṭapam|
yāta kālaṃ pratīkṣanto yataḥ śatrorviparyayaḥ|| 30
अर्थ
इसलिये तुमलोग स्वर्गको छोड़कर कहीं छिप जाओ और उस समयकी प्रतीक्षा करो, जब तुम्हारे शत्रुका भाग्यचक्र पलटे॥ ३०॥✎ 747
तस्मान्निलयमुत्सृज्य यूयं सर्वे त्रिविष्टपम्।
यात कालं प्रतीक्षन्तो यतः शत्रोर्विपर्ययः॥ ३०
इसलिये तुमलोग स्वर्गको छोड़कर कहीं छिप जाओ और उस समयकी प्रतीक्षा करो, जब तुम्हारे शत्रुका भाग्यचक्र पलटे॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.15.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 977) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/15/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #747 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्को