श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.12

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

अग्नयोऽतिथयो भृत्या भिक्षवो ये च लिप्सवः।

सर्वं भगवतो ब्रह्मन्‍ननुध्यानान्‍न रिष्यति॥ १२

agnayo'tithayo bhṛtyā bhikṣavo ye ca lipsavaḥ|

sarvaṃ bhagavato brahmannanudhyānānna riṣyati|| 12

अर्थ

प्रभो! आपके निरन्तर स्मरण और कल्याण-कामनासे अग्‍नि, अतिथि, सेवक, भिक्षुक और दूसरे याचकोंका भी मैंने तिरस्कार नहीं किया है॥ १२॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें