॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.16.12
अग्नयोऽतिथयो भृत्या भिक्षवो ये च लिप्सवः।
सर्वं भगवतो ब्रह्मन्ननुध्यानान्न रिष्यति॥ १२
agnayo'tithayo bhṛtyā bhikṣavo ye ca lipsavaḥ|
sarvaṃ bhagavato brahmannanudhyānānna riṣyati|| 12
अर्थ
प्रभो! आपके निरन्तर स्मरण और कल्याण-कामनासे अग्नि, अतिथि, सेवक, भिक्षुक और दूसरे याचकोंका भी मैंने तिरस्कार नहीं किया है॥ १२॥