श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.23

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

आदिश त्वं द्विजश्रेष्ठ विधिं तदुपधावनम्।

आशु तुष्यति मे देवः सीदन्त्याः सह पुत्रकैः॥ २३

ādiśa tvaṃ dvijaśreṣṭha vidhiṃ tadupadhāvanam|

āśu tuṣyati me devaḥ sīdantyāḥ saha putrakaiḥ|| 23

अर्थ

पतिदेव! मैं अपने पुत्रोंके साथ बहुत ही दुःख भोग रही हूँ। जिससे वे शीघ्र ही मुझपर प्रसन्‍न हो जायँ, उनकी आराधनाकी वही विधि मुझे बतलाइये॥ २३॥✎ 750

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #750 शब्दोंके बीचका स्थान: जगदीश्‍वरभगवान् की → जगदीश्‍वरभगवान्‌की

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें