na dharmasya na lokasya mṛtyośchandānuvartinaḥ|| 4
अर्थ
‘कल्याणी! इस समय संसारमें ब्राह्मणोंपर कोई विपत्ति तो नहीं आयी है? धर्मका पालन तो ठीक-ठीक होता है? कालके कराल गालमें पड़े हुए लोगोंका कुछ अमंगल तो नहीं हो रहा है?॥ ४॥✎ 2035
अप्यभद्रं न विप्राणां भद्रे लोकेऽधुनाऽऽगतम्।
न धर्मस्य न लोकस्य मृत्योश्छन्दानुवर्तिनः॥ ४
‘कल्याणी! इस समय संसारमें ब्राह्मणोंपर कोई विपत्ति तो नहीं आयी है? धर्मका पालन तो ठीक-ठीक होता है? कालके कराल गालमें पड़े हुए लोगोंका कुछ अमंगल तो नहीं हो रहा है?॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 978) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/16/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)