श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.46

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

पयोभक्षो व्रतमिदं चरेद् विष्ण्वर्चनादृतः।

पूर्ववज्जुहुयादग्निं ब्राह्मणांश्चापि भोजयेत्॥ ४६✎ 1117 1118

payobhakṣo vratamidaṃ cared viṣṇvarcanādṛtaḥ|

pūrvavajjuhuyādagniṃ brāhmaṇāṃścāpi bhojayet|| 46

अर्थ

भगवान्‌की पूजामें आदर-बुद्धि रखते हुए केवल पयोव्रती रहकर यह व्रत करना चाहिये। पूर्ववत् प्रतिदिन हवन और ब्राह्मण भोजन भी कराना चाहिये॥ ४६॥✎ 758

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #758 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #1117 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पूर्ववज्जुहुयादग्ंिन → पूर्ववज्जुहुयादग्ं
  • #1118 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पूर्ववज्जुहुयादग्ं → पूर्ववज्जुहुयादग्निं

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