श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.7

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

गृहेषु येष्वतिथयो नार्चिताः सलिलैरपि।

यदि निर्यान्ति ते नूनं फेरुराजगृहोपमाः॥ ७

gṛheṣu yeṣvatithayo nārcitāḥ salilairapi|

yadi niryānti te nūnaṃ pherurājagṛhopamāḥ|| 7

अर्थ

जिन घरोंमें आये हुए अतिथिका जलसे भी सत्कार नहीं किया जाता और वे ऐसे ही लौट जाते हैं, वे घर अवश्य ही गीदड़ोंके घरके समान हैं॥ ७॥

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