श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.9

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

यत्पूजया कामदुघान्याति लोकान्गृहान्वितः।

ब्राह्मणोऽग्‍निश्‍च वै विष्णोः सर्वदेवात्मनो मुखम्॥ ९

yatpūjayā kāmadughānyāti lokāngṛhānvitaḥ|

brāhmaṇo'gniśca vai viṣṇoḥ sarvadevātmano mukham|| 9

अर्थ

सर्वदेवमय भगवान्‌के मुख हैं—ब्राह्मण और अग्‍नि। गृहस्थ पुरुष यदि इन दोनोंकी पूजा करता है तो उसे उन लोकोंकी प्राप्ति होती है, जो समस्त कामनाओंको पूर्ण करनेवाले हैं॥ ९॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें