श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! अपने पतिदेव महर्षि कश्यपजीका उपदेश प्राप्त करके अदितिने बड़ी सावधानीसे बारह दिनतक इस व्रतका अनुष्ठान किया॥ १॥✎ 769770771772
इत्युक्ता सादिती राजन्स्वभर्त्रा कश्यपेन वै।
अन्वतिष्ठद् व्रतमिदं द्वादशाहमतन्द्रिता॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! अपने पतिदेव महर्षि कश्यपजीका उपदेश प्राप्त करके अदितिने बड़ी सावधानीसे बारह दिनतक इस व्रतका अनुष्ठान किया॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.17.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 985) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/17/1/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)