॥ श्रीहरिः ॥
तस्मादेतद्व्रतं भद्रे प्रयता श्रद्धया चर।
भगवान्परितुष्टस्ते वरानाशु विधास्यति॥ ६२
tasmādetadvrataṃ bhadre prayatā śraddhayā cara|
bhagavānparituṣṭaste varānāśu vidhāsyati|| 62
अर्थ
इसलिये देवि! संयम और श्रद्धासे तुम इस व्रतका अनुष्ठान करो। भगवान् शीघ्र ही तुमपर प्रसन्न होंगे और तुम्हारी अभिलाषा पूर्ण करेंगे॥ ६२॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामष्टमस्कन्धेऽदिति-
पयोव्रतकथनं नाम षोडशोऽध्यायः॥ १६॥
तस्मादेतद्व्रतं भद्रे प्रयता श्रद्धया चर।
भगवान्परितुष्टस्ते वरानाशु विधास्यति॥ ६२
इसलिये देवि! संयम और श्रद्धासे तुम इस व्रतका अनुष्ठान करो। भगवान् शीघ्र ही तुमपर प्रसन्न होंगे और तुम्हारी अभिलाषा पूर्ण करेंगे॥ ६२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.62 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 984) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/16/62/