कल्याणी! तुम अपने पति कश्यपमें मुझे इसी रूपमें स्थित देखो और उन निष्पाप प्रजापतिकी सेवा करो॥ १९॥✎ 1951
उपधाव पतिं भद्रे प्रजापतिमकल्मषम्।
मां च भावयती पत्यावेवंरूपमवस्थितम्॥ १९
कल्याणी! तुम अपने पति कश्यपमें मुझे इसी रूपमें स्थित देखो और उन निष्पाप प्रजापतिकी सेवा करो॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.17.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 987) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/17/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1951 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): स्थति → स्थित