भगवान्को वामन ब्रह्मचारीके रूपमें देखकर महर्षियोंको बड़ा आनन्द हुआ। उन लोगोंने कश्यप प्रजापतिको आगे करके उनके जातकर्म आदि संस्कार करवाये॥ १३॥✎ 7827831626
तं वटुं वामनं दृष्ट्वा मोदमाना महर्षयः।
कर्माणि कारयामासुः पुरस्कृत्य प्रजापतिम्॥ १३
भगवान्को वामन ब्रह्मचारीके रूपमें देखकर महर्षियोंको बड़ा आनन्द हुआ। उन लोगोंने कश्यप प्रजापतिको आगे करके उनके जातकर्म आदि संस्कार करवाये॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.18.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 990) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/18/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)