श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.18.14

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

तस्योपनीयमानस्य सावित्रीं सविताब्रवीत्।

बृहस्पतिर्ब्रह्मसूत्रं मेखलां कश्यपोऽददात्॥ १४

tasyopanīyamānasya sāvitrīṃ savitābravīt|

bṛhaspatirbrahmasūtraṃ mekhalāṃ kaśyapo'dadāt|| 14

अर्थ

जब उनका उपनयन-संस्कार होने लगा, तब गायत्रीके अधिष्ठातृ-देवता स्वयं सविताने उन्हें गायत्रीका उपदेश किया। देवगुरु बृहस्पतिजीने यज्ञोपवीत और कश्यपने मेखला दी॥ १४॥✎ 782 783 1626

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #782 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #783 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #1626 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: वामन-भगवान्‌का → वामनभगवान्‌का

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