श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.18.19

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

समिद्धमाहितं वह्निं कृत्वा परिसमूहनम्।

परिस्तीर्य समभ्यर्च्य समिद्भिरजुहोद् द्विजः॥ १९

samiddhamāhitaṃ vahniṃ kṛtvā parisamūhanam|

paristīrya samabhyarcya samidbhirajuhod dvijaḥ|| 19

अर्थ

इसके बाद भगवान्‌ने स्थापित और प्रज्वलित अग्‍निका कुशोंसे परिसमूहन और परिस्तरण करके पूजा की और समिधाओंसे हवन किया॥ १९॥✎ 784

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #784 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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