परीक्षित्! उसी समय भगवान्ने सुना कि सब प्रकारकी सामग्रियोंसे सम्पन्न यशस्वी बलि भृगुवंशी ब्राह्मणोंके आदेशानुसार बहुत-से अश्वमेध यज्ञ कर रहे हैं, तब उन्होंने वहाँके लिये यात्रा की। भगवान् समस्त शक्तियोंसे युक्त हैं। उनके चलनेके समय उनके भारसे पृथ्वी पग-पगपर झुकने लगी॥ २०॥✎ 785
श्रुत्वाश्वमेधैर्यजमानमूर्जितं
बलिं भृगूणामुपकल्पितैस्ततः।
जगाम तत्राखिलसारसंभृतो
भारेण गां सन्नमयन्पदे पदे॥ २०
परीक्षित्! उसी समय भगवान्ने सुना कि सब प्रकारकी सामग्रियोंसे सम्पन्न यशस्वी बलि भृगुवंशी ब्राह्मणोंके आदेशानुसार बहुत-से अश्वमेध यज्ञ कर रहे हैं, तब उन्होंने वहाँके लिये यात्रा की। भगवान् समस्त शक्तियोंसे युक्त हैं। उनके चलनेके समय उनके भारसे पृथ्वी पग-पगपर झुकने लगी॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.18.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 990) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/18/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)