परीक्षित्! जिस समय भगवान्ने जन्म ग्रहण किया, उस समय चन्द्रमा श्रवण नक्षत्रपर थे। भाद्रपद मासके शुक्लपक्षकी श्रवणनक्षत्रवाली द्वादशी थी। अभिजित् मुहूर्तमें भगवान्का जन्म हुआ था। सभी नक्षत्र और तारे भगवान्के जन्मको मंगलमय सूचित कर रहे थे॥ ५॥✎ 779
श्रोणायां श्रवणद्वादश्यां मुहूर्तेऽभिजिति प्रभुः।
सर्वे नक्षत्रताराद्याश्चक्रुस्तज्जन्म दक्षिणम्॥ ५
परीक्षित्! जिस समय भगवान्ने जन्म ग्रहण किया, उस समय चन्द्रमा श्रवण नक्षत्रपर थे। भाद्रपद मासके शुक्लपक्षकी श्रवणनक्षत्रवाली द्वादशी थी। अभिजित् मुहूर्तमें भगवान्का जन्म हुआ था। सभी नक्षत्र और तारे भगवान्के जन्मको मंगलमय सूचित कर रहे थे॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.18.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 989) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/18/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)