श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.19.10

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

एवं स निश्चित्य रिपोः शरीर-

माधावतो निर्विविशेऽसुरेन्द्र।

श्वासानिलान्तर्हितसूक्ष्मदेह-

स्तत्प्राणरन्ध्रेण विविग्नचेताः॥ १०

evaṃ sa niścitya ripoḥ śarīra-

mādhāvato nirviviśe'surendra|

śvāsānilāntarhitasūkṣmadeha-

statprāṇarandhreṇa vivignacetāḥ|| 10

अर्थ

असुरशिरोमणे! जिस समय हिरण्यकशिपु उनपर झपट रहा था, उसी समय ऐसा निश्‍चय करके डरसे काँपते हुए विष्णुभगवान्‌ने अपने शरीरको सूक्ष्म बना लिया और उसके प्राणोंके द्वारा नासिकामेंसे होकर हृदयमें जा बैठे॥ १०॥✎ 792

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #792 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् ने → विष्णुभगवान्‌ने

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