श्रीशुकदेवजी कहते हैं—भगवान्के इस प्रकार कहनेपर राजा बलि हँस पड़े। उन्होंने कहा—‘अच्छी बात है; जितनी तुम्हारी इच्छा हो, उतनी ही ले लो।’ यों कहकर वामनभगवान्को तीन पग पृथ्वीका संकल्प करनेके लिये उन्होंने जलपात्र उठाया॥ २८॥✎ 795796
इत्युक्तः स हसन्नाह वाञ्छातः प्रतिगृह्यताम्।
वामनाय महीं दातुं जग्राह जलभाजनम्॥ २८
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—भगवान्के इस प्रकार कहनेपर राजा बलि हँस पड़े। उन्होंने कहा—‘अच्छी बात है; जितनी तुम्हारी इच्छा हो, उतनी ही ले लो।’ यों कहकर वामनभगवान्को तीन पग पृथ्वीका संकल्प करनेके लिये उन्होंने जलपात्र उठाया॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.19.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 996) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/19/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)