श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.20.8

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

यैरियं बुभुजे ब्रह्मन्दैत्येन्द्रैरनिवर्तिभिः।

तेषां कालोऽग्रसील्लोकान् न यशोऽधिगतं भुवि॥ ८

yairiyaṃ bubhuje brahmandaityendrairanivartibhiḥ|

teṣāṃ kālo'grasīllokān na yaśo'dhigataṃ bhuvi|| 8

अर्थ

ब्रह्मन्! पहले युगमें बड़े-बड़े दैत्यराजोंने इस पृथ्वीका उपभोग किया है। पृथ्वीमें उनका सामना करनेवाला कोई नहीं था। उनके लोक और परलोकको तो काल खा गया, परन्तु उनका यश अभी पृथ्वीपर ज्यों-का-त्यों बना हुआ है॥ ८॥

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