श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.20.9

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

सुलभा युधि विप्रर्षे ह्यनिवृत्तास्तनुत्यजः।

न तथा तीर्थ आयाते श्रद्धया ये धनत्यजः॥ ९

sulabhā yudhi viprarṣe hyanivṛttāstanutyajaḥ|

na tathā tīrtha āyāte śraddhayā ye dhanatyajaḥ|| 9

अर्थ

गुरुदेव! ऐसे लोग संसारमें बहुत हैं, जो युद्धमें पीठ न दिखाकर अपने प्राणोंकी बलि चढ़ा देते हैं; परन्तु ऐसे लोग बहुत दुर्लभ हैं, जो सत्पात्रके प्राप्त होनेपर श्रद्धाके साथ धनका दान करें॥ ९॥

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