॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.20.9
सुलभा युधि विप्रर्षे ह्यनिवृत्तास्तनुत्यजः।
न तथा तीर्थ आयाते श्रद्धया ये धनत्यजः॥ ९
sulabhā yudhi viprarṣe hyanivṛttāstanutyajaḥ|
na tathā tīrtha āyāte śraddhayā ye dhanatyajaḥ|| 9
अर्थ
गुरुदेव! ऐसे लोग संसारमें बहुत हैं, जो युद्धमें पीठ न दिखाकर अपने प्राणोंकी बलि चढ़ा देते हैं; परन्तु ऐसे लोग बहुत दुर्लभ हैं, जो सत्पात्रके प्राप्त होनेपर श्रद्धाके साथ धनका दान करें॥ ९॥