परीक्षित्! जब विष्णुभगवान्के पार्षदोंने देखा कि दैत्योंके सेनापति आक्रमण करनेके लिये दौड़े आ रहे हैं, तब उन्होंने हँसकर अपने-अपने शस्त्र उठा लिये और उन्हें रोक दिया॥ १५॥✎ 8091628
तानभिद्रवतो दृष्ट्वा दितिजानीकपान् नृप।
प्रहस्यानुचरा विष्णोः प्रत्यषेधन्नुदायुधाः॥ १५
परीक्षित्! जब विष्णुभगवान्के पार्षदोंने देखा कि दैत्योंके सेनापति आक्रमण करनेके लिये दौड़े आ रहे हैं, तब उन्होंने हँसकर अपने-अपने शस्त्र उठा लिये और उन्हें रोक दिया॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.21.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1004) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/21/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#809 शब्दोंके बीचका स्थान: वामन-भगवान् को → वामन-भगवान्को