श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.21.14

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

ते सर्वे वामनं हन्तुं शूलपट्टिशपाणयः।

अनिच्छतो बले राजन् प्राद्रवन् जातमन्यवः॥ १४

te sarve vāmanaṃ hantuṃ śūlapaṭṭiśapāṇayaḥ|

anicchato bale rājan prādravan jātamanyavaḥ|| 14

अर्थ

परीक्षित्! राजा बलिकी इच्छा न होनेपर भी वे सब बड़े क्रोधसे शूल, पट्टिश आदि ले-लेकर वामनभगवान्‌को मारनेके लिये टूट पड़े॥ १४॥✎ 809 1628

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #809 शब्दोंके बीचका स्थान: वामन-भगवान् को → वामन-भगवान्‌को
  • #1628 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: वामन-भगवान्‌को → वामनभगवान्‌को

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