तस्मात् कालं प्रतीक्षध्वं यो नोऽर्थत्वाय कल्पते॥ २४
etān vayaṃ vijeṣyāmo yadi daivaṃ prasīdati|
tasmāt kālaṃ pratīkṣadhvaṃ yo no'rthatvāya kalpate|| 24
अर्थ
यदि दैव हमारे अनुकूल हो जायगा, तो हम भी इन्हें जीत लेंगे। इसलिये उस समयकी प्रतीक्षा करो, जो हमारी कार्य-सिद्धिके लिये अनुकूल हो’॥ २४॥
एतान् वयं विजेष्यामो यदि दैवं प्रसीदति।
तस्मात् कालं प्रतीक्षध्वं यो नोऽर्थत्वाय कल्पते॥ २४
यदि दैव हमारे अनुकूल हो जायगा, तो हम भी इन्हें जीत लेंगे। इसलिये उस समयकी प्रतीक्षा करो, जो हमारी कार्य-सिद्धिके लिये अनुकूल हो’॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.21.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1005) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/21/24/