॥ श्रीहरिः ॥
अथ तार्क्ष्यसुतो ज्ञात्वा विराट् प्रभुचिकीर्षितम्।
बबन्ध वारुणैः पाशैर्बलिं सौत्येऽहनि क्रतौ॥ २६
atha tārkṣyasuto jñātvā virāṭ prabhucikīrṣitam|
babandha vāruṇaiḥ pāśairbaliṃ sautye'hani kratau|| 26
अर्थ
उनके जानेके बाद भगवान्के हृदयकी बात जानकर पक्षिराज गरुडने वरुणके पाशोंसे बलिको बाँध दिया। उस दिन उनके अश्वमेध यज्ञमें सोमपान होनेवाला था॥ २६॥
अथ तार्क्ष्यसुतो ज्ञात्वा विराट् प्रभुचिकीर्षितम्।
बबन्ध वारुणैः पाशैर्बलिं सौत्येऽहनि क्रतौ॥ २६
उनके जानेके बाद भगवान्के हृदयकी बात जानकर पक्षिराज गरुडने वरुणके पाशोंसे बलिको बाँध दिया। उस दिन उनके अश्वमेध यज्ञमें सोमपान होनेवाला था॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.21.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1005) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/21/26/