श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.21.27

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

हाहाकारो महानासीद् रोदस्योः सर्वतोदिशम्।

गृह्यमाणेऽसुरपतौ विष्णुना प्रभविष्णुना॥ २७

hāhākāro mahānāsīd rodasyoḥ sarvatodiśam|

gṛhyamāṇe'surapatau viṣṇunā prabhaviṣṇunā|| 27

अर्थ

जब सर्वशक्तिमान् भगवान् विष्णुने बलिको इस प्रकार बँधवा दिया, तब पृथ्वी, आकाश और समस्त दिशाओंमें लोग ‘हाय-हाय!’ करने लगे॥ २७॥✎ 810

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #810 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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