‘असुर! तुमने मुझे पृथ्वीके तीन पग दिये थे; दो पगमें तो मैंने सारी त्रिलोकी नाप ली, अब तीसरा पग पूरा करो॥ २९॥✎ 810
पदानि त्रीणि दत्तानि भूमेर्मह्यं त्वयासुर।
द्वाभ्यां क्रान्ता मही सर्वा तृतीयमुपकल्पय॥ २९
‘असुर! तुमने मुझे पृथ्वीके तीन पग दिये थे; दो पगमें तो मैंने सारी त्रिलोकी नाप ली, अब तीसरा पग पूरा करो॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.21.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1005) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/21/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)