जब भगवान्ने अपने स्वरूपको कुछ छोटा कर लिया, अपनी विभूतियोंको कुछ समेट लिया, तब ब्रह्मा आदि लोकपालोंने अपने अनुचरोंके साथ बड़े आदरभावसे अपने स्वामी भगवान्को अनेकों प्रकारकी भेंटें समर्पित कीं॥ ५॥✎ 804805806807808
ब्रह्मादयो लोकनाथाः स्वनाथाय समादृताः।
सानुगा बलिमाजह्रुः संक्षिप्तात्मविभूतये॥ ५
जब भगवान्ने अपने स्वरूपको कुछ छोटा कर लिया, अपनी विभूतियोंको कुछ समेट लिया, तब ब्रह्मा आदि लोकपालोंने अपने अनुचरोंके साथ बड़े आदरभावसे अपने स्वामी भगवान्को अनेकों प्रकारकी भेंटें समर्पित कीं॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.21.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1003) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/21/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (5)