परन्तु इतनेमें ही राजा बलिकी परम साध्वी पत्नी विन्ध्यावलीने अपने पतिको बँधा देखकर भयभीत हो भगवान्के चरणोंमें प्रणाम किया और हाथ जोड़, मुँह नीचा कर वह भगवान्से बोली॥ १९॥✎ 814815
बद्धं वीक्ष्य पतिं साध्वी तत्पत्नी भयविह्वला।
प्राञ्जलिः प्रणतोपेन्द्रं बभाषेऽवाङ्मुखी नृप॥ १९
परन्तु इतनेमें ही राजा बलिकी परम साध्वी पत्नी विन्ध्यावलीने अपने पतिको बँधा देखकर भयभीत हो भगवान्के चरणोंमें प्रणाम किया और हाथ जोड़, मुँह नीचा कर वह भगवान्से बोली॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.22.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1008) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/22/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)