श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.22.19

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

बद्धं वीक्ष्य पतिं साध्वी तत्पत्नी भयविह्वला।

प्राञ्जलिः प्रणतोपेन्द्रं बभाषेऽवाङ्मुखी नृप॥ १९

baddhaṃ vīkṣya patiṃ sādhvī tatpatnī bhayavihvalā|

prāñjaliḥ praṇatopendraṃ babhāṣe'vāṅmukhī nṛpa|| 19

अर्थ

परन्तु इतनेमें ही राजा बलिकी परम साध्वी पत्‍नी विन्ध्यावलीने अपने पतिको बँधा देखकर भयभीत हो भगवान्‌के चरणोंमें प्रणाम किया और हाथ जोड़, मुँह नीचा कर वह भगवान्‌से बोली॥ १९॥✎ 814 815

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #814 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से
  • #815 शब्दोंके बीचका स्थान: वामनभगवान् से → वामनभगवान्‌से

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