॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.22.21
ब्रह्मोवाच
भूतभावन भूतेश देवदेव जगन्मय।
मुञ्चैनं हृतसर्वस्वं नायमर्हति निग्रहम्॥ २१
bhūtabhāvana bhūteśa devadeva jaganmaya|
muñcainaṃ hṛtasarvasvaṃ nāyamarhati nigraham|| 21
अर्थ
ब्रह्माजीने कहा—समस्त प्राणियोंके जीवनदाता, उनके स्वामी और जगत्स्वरूप देवाधिदेव प्रभो! अब आप इसे छोड़ दीजिये। आपने इसका सर्वस्व ले लिया है, अतः अब यह दण्डका पात्र नहीं है॥ २१॥