श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.22.34

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

न त्वामभिभविष्यन्ति लोकेशाः किमुतापरे।

त्वच्छासनातिगान् दैत्यांश्‍चक्रं मे सूदयिष्यति॥ ३४

na tvāmabhibhaviṣyanti lokeśāḥ kimutāpare|

tvacchāsanātigān daityāṃścakraṃ me sūdayiṣyati|| 34

अर्थ

बड़े-बड़े लोकपाल भी अब तुम्हें पराजित नहीं कर सकेंगे, दूसरोंकी तो बात ही क्या है! जो दैत्य तुम्हारी आज्ञाका उल्लंघन करेंगे, मेरा चक्र उनके टुकड़े-टुकड़े कर देगा॥ ३४॥

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