baddhaśca vāruṇaiḥ pāśairnātivrīḍe na ca vyathe|| 7
अर्थ
जिनकी ऐसी महिमा, ऐसी अनन्त लीलाएँ हैं, वही आप मुझे दण्ड दे रहे हैं और वरुणपाशसे बाँध रहे हैं। इसकी न तो मुझे कोई लज्जा है और न किसी प्रकारकी व्यथा ही॥ ७॥
तेनाहं निगृहीतोऽस्मि भवता भूरिकर्मणा।
बद्धश्च वारुणैः पाशैर्नातिव्रीडे न च व्यथे॥ ७
जिनकी ऐसी महिमा, ऐसी अनन्त लीलाएँ हैं, वही आप मुझे दण्ड दे रहे हैं और वरुणपाशसे बाँध रहे हैं। इसकी न तो मुझे कोई लज्जा है और न किसी प्रकारकी व्यथा ही॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.22.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1007) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/22/7/