परीक्षित्! उस समय सत्यव्रत नामके एक बड़े उदार एवं भगवत्परायण राजर्षि केवल जल पीकर तपस्या कर रहे थे॥ १०॥✎ 832
तत्र राजऋषिः कश्चिन्नाम्ना सत्यव्रतो महान्।
नारायणपरोऽतप्यत् तपः स सलिलाशनः॥ १०
परीक्षित्! उस समय सत्यव्रत नामके एक बड़े उदार एवं भगवत्परायण राजर्षि केवल जल पीकर तपस्या कर रहे थे॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1015) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/24/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)