राजा सत्यव्रतने उस मछलीकी अत्यन्त दीनतासे भरी बात सुनकर बड़ी दयासे उसे अपने पात्रके जलमें रख लिया और अपने आश्रमपर ले आये॥ १६॥
तस्या दीनतरं वाक्यमाश्रुत्य स महीपतिः।
कलशाप्सु निधायैनां दयालुर्निन्य आश्रमम्॥ १६
राजा सत्यव्रतने उस मछलीकी अत्यन्त दीनतासे भरी बात सुनकर बड़ी दयासे उसे अपने पात्रके जलमें रख लिया और अपने आश्रमपर ले आये॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1016) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/24/16/