परीक्षित्! सत्यव्रतने वहाँसे उस मछलीको उठाकर एक सरोवरमें डाल दिया। परन्तु वह थोड़ी ही देरमें इतनी बढ़ गयी कि उसने एक महामत्स्यका आकार धारण कर उस सरोवरके जलको घेर लिया॥ २१॥✎ 8332038
तत आदाय सा राज्ञा क्षिप्ता राजन् सरोवरे।
तदावृत्यात्मना सोऽयं महामीनोऽन्ववर्धत॥ २१
परीक्षित्! सत्यव्रतने वहाँसे उस मछलीको उठाकर एक सरोवरमें डाल दिया। परन्तु वह थोड़ी ही देरमें इतनी बढ़ गयी कि उसने एक महामत्स्यका आकार धारण कर उस सरोवरके जलको घेर लिया॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1016) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/24/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#833 शब्दोंके बीचका स्थान: मत्स्यभगवान् ने → मत्स्यभगवान्ने