यद्यपि आपके सभी लीलावतार प्राणियोंके अभ्युदयके लिये ही होते हैं, तथापि मैं यह जानना चाहता हूँ कि आपने यह रूप किस उद्देश्यसे ग्रहण किया है॥ २९॥
सर्वे लीलावतारास्ते भूतानां भूतिहेतवः।
ज्ञातुमिच्छाम्यदो रूपं यदर्थं भवता धृतम्॥ २९
यद्यपि आपके सभी लीलावतार प्राणियोंके अभ्युदयके लिये ही होते हैं, तथापि मैं यह जानना चाहता हूँ कि आपने यह रूप किस उद्देश्यसे ग्रहण किया है॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1017) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/24/29/