जब प्रचण्ड आँधी चलनेके कारण नाव डगमगाने लगेगी, तब मैं इसी रूपमें वहाँ आ जाऊँगा और तुम लोग वासुकिनागके द्वारा उस नावको मेरे सींगमें बाँध देना॥ ३६॥
दोधूयमानां तां नावं समीरेण बलीयसा।
उपस्थितस्य मे शृङ्गे निबध्नीहि महाहिना॥ ३६
जब प्रचण्ड आँधी चलनेके कारण नाव डगमगाने लगेगी, तब मैं इसी रूपमें वहाँ आ जाऊँगा और तुम लोग वासुकिनागके द्वारा उस नावको मेरे सींगमें बाँध देना॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1018) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/24/36/