उनकी आज्ञासे राजाने भगवान्का ध्यान किया। उसी समय उस महान् समुद्रमें मत्स्यके रूपमें भगवान् प्रकट हुए। मत्स्यभगवान्का शरीर सोनेके समान देदीप्यमान था और शरीरका विस्तार था चार लाख कोस। उनके शरीरमें एक बड़ा भारी सींग भी था॥ ४४॥✎ 839840841
सोऽनुध्यातस्ततो राज्ञा प्रादुरासीन्महार्णवे।
एकशृङ्गधरो मत्स्यो हैमो नियुतयोजनः॥ ४४
उनकी आज्ञासे राजाने भगवान्का ध्यान किया। उसी समय उस महान् समुद्रमें मत्स्यके रूपमें भगवान् प्रकट हुए। मत्स्यभगवान्का शरीर सोनेके समान देदीप्यमान था और शरीरका विस्तार था चार लाख कोस। उनके शरीरमें एक बड़ा भारी सींग भी था॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1019) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/24/44/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)