इसके बाद जब पिछले प्रलयका अन्त हो गया और ब्रह्माजीकी नींद टूटी, तब भगवान्ने हयग्रीव असुरको मारकर उससे वेद छीन लिये और ब्रह्माजीको दे दिये॥ ५७॥✎ 844
अतीतप्रलयापाय उत्थिताय स वेधसे।
हत्वासुरं हयग्रीवं वेदान् प्रत्याहरद्धरिः॥ ५७
इसके बाद जब पिछले प्रलयका अन्त हो गया और ब्रह्माजीकी नींद टूटी, तब भगवान्ने हयग्रीव असुरको मारकर उससे वेद छीन लिये और ब्रह्माजीको दे दिये॥ ५७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.57 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1020) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/24/57/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)